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पोलियो के शिकार इस शख्स ने एक नहीं दो बार खड़ी कर ली 1000 करोड़ की कंपनी

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पोलियो के शिकार इस शख्स ने एक नहीं दो बार
पोलियो के शिकार इस शख्स ने एक नहीं दो बार

नई दिल्ली ब्योरो रिपोर्ट :- वो कहावत है न “कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों” इसी कहावत को चरितार्थ किया है एक दिव्यांग व्यक्ति ने। एक ऐसा व्यक्ति जिसने एक नहीं दो बार शुन्य के शिखर तक की चढ़ाई की। पोलियो से ग्रसित इस व्यक्ति का बचपन बहुत गरीबी में बीता। लेकिन इसने यह साबित कर दिया है की अगर व्यक्ति में दृढ संकल्प शक्ति और हौसले बुलंद हो तो कुछ भी असंभव नहीं।

यह कहानी है V2 रिटेल लिमिटेड कंपनी के संस्थापक रामचंद्र अग्रवाल की। बेहद गरीब घर में पैदा हुए अग्रवाल को बचपन में ही पोलियो ने अपना शिकार बना लिया जिस कारण वो चलने फिरने के लिए बैसाखियों पर निर्भर हो गये। रामचंद्र ने 1986 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद लोन लेकर फोटो कॉपी की दुकान लगायी। लगभग एक साल दुकान चलाने के बाद अग्रवाल को यह बिजनेस रास नहीं आया और खुदरा बाज़ार में हाथ आजमाने के लिए कोलकाता के लाल बाज़ार में कपड़े की दुकान खोल ली।

तकरीबन 15 साल तक कपड़े की दुकान चलाने के बाद अग्रवाल इस धंधे की बारीकी और इसकी रग रग से परिचित हो गये। उनको इसमें भविष्य में बहुत सी संभावनाएं दिखी। इसलिए इसे एक नए स्तर पर ले जाने की सोची। इसी के अंतर्गत अग्रवाल ने एक अहम फैसला लेते हुए 2001 में कोलकाता छोड़कर अपना बिजनेस दिल्ली में शिफ्ट किया। हालाँकि यह सब एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए इतना आसान नहीं था, लेकिन कहते है न की जब कुछ कर गुजरने का जूनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं।

अग्रवाल ने दिल्ली पहुँच कर “विशाल रिटेल” नाम से खुदरा व्यापार का आगाज किया। एक छोटे से स्टोर से शुरू हुआ यह बिजनेस मेहनत, ईमानदारी और लगन के चलते दिल्ली में “विशाल मेगामार्ट” के रूप में आसपास के क्षेत्रों में फ़ैल गया। समय के साथ यह बिजनेस दिल्ली के अलावा भी कई शहरों में फैलता गया।

अग्रवाल का यह बिजनेस दिन-दुनी रात चौगुनी बढ़ रहा था। साल 2007 में शेयर मार्केट अपनी तेजी में था और विशाल रिटेल भी अपनी लोकप्रियता और आउटलेट्स में सुविधाएँ बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था। इसी सिलसिले में कंपनी ने बैंकों से भारी मात्रा में लोन लिया।

साल 2008 कंपनी के लिए काल बनकर आया। शेयर बाजार में भयंकर गिरावट के कारण कंपनी को 750 करोड़ रूपये का घाटा हुआ और कंपनी दिवालिया हो गयी। आखिर उधार चुकाने के लिए अग्रवाल को कंपनी बेचनी पड़ी। ऐसे में आप अच्छी तरह से अंदाजा लगा सकते है की उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या रही होगी जो शारीरिक रूप से अपाहिज है। इस अवस्था के बावजूद भी रामचंद्र ने हार नहीं मानी। यही कारण है की आज हम यहाँ उनकी चर्चा कर रहे है।

यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यही से शुरू होता है एक नया अध्याय। इसकी शुरुआत होती है “V2 रिटेल” नाम के खुदरा व्यापार से। रामचंद्र अग्रवाल ने पुन: एक बार वही पुराना खुदरा व्यापार आरम्भ किया। आज V2 रिटेल लिमिटेड भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली कम्पनियों में से एक है। देश के विभिन्न शहरों में V2 रिटेल के आउटलेट्स है, और खुदरा व्यापार की अग्रणी कम्पनियों में इनका नाम आता है। रामचंद्र अग्रवाल की यह कहानी हर एक के लिए एक मिशाल है जो किस्मत और हालात को कोसते है।


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