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आखिर क्यों नहीं दिखते सरकारी तंत्र को शादियों में रोड लाइट ढोते नाबालिग बच्चे

आखिर क्यों नहीं दिखते सरकारी तंत्र को
घाटमपुर । जी हां भारत को सशक्त बनाने की बात कही जाती है भारत को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कही जाती है नए-नए वादों के साथ नहीं नहीं सरकारें चुनी जाती है मंत्री काम करते हैं बाल श्रम को हटाने की बात कही जाती है उसके लिए कई एनजीओ भी कार्यरत हैं जो दिखाते हैं कि उन्होंने बाल श्रम करने वाले कितने बच्चों को मुक्त कराया उसके बाद जो सच्चाई सभी को सामने दिखती है उससे सरकारी तंत्र के साथ-साथ तमाम आएंगी और आम जनता भी मुंह मोड़ने को तैयार हैं
शादियों में आम नजारों की तरीके हैं नाबालिग बच्चों का रोड लाइट ढोना
अगर बात की जाए शादियों की किस्में बैंड में शादी के जश्न में नाचते लोगों के बीच में जब नजर जाती है तो उसी बैंड की रोड लाइटें 15 से लेकर 17 वर्ष के नाबालिक छोटे बच्चे रो रहे होते हैं और यह मामला किसी एक जिले का नहीं है पूरे प्रदेश की शादियों में देखा जाए तो कहीं ना कहीं यह नजारा जरूर देखने को मिल जाता है 200 रुपये के लिए यह बच्चे घंटों के हिसाब से अपने सर में और कंधों में इन रोड लाइटों को उठाते हैं इनमें से कई मासूमों को देखकर यह लगता है कि आखिर इन मासूमों से जो वादे सरकार एनजीओ और तमाम समाजसेवी संस्थाओं ने किए हैं वह आखिर कहां गुम हो जाते हैं क्यों इन बच्चों के ऊपर उन सभी की नजर नहीं पड़ती जबकि सामने साफ साफ दिखाई दे रहा होता है यह बाल श्रम है
शादियों में देर तक ना बजे DJ इसके लिए इंतजाम इन सब चीजों को रोकने के लिए क्यों नहीं किए जा सकते इंतजामात
शादी में देर रात तक DJ ना बजे इसके लिए कई प्रकार के कार्य किए गए और यह कार्य की गई है ठीक भी है समाज हित में जिससे कि धनी प्रदूषण के साथ-साथ आम जनता को भी परेशानी ना हो पर जब आम जनता के साथ साथ आला अधिकारी भी देखते होंगे 21 तरह इन बड़ी-बड़ी शादियों में एक छोटे बच्चे रोड लाइटों को उठाते हैं उसके बाद भी क्यों नहीं ऐसी कमेटी बनाई गई जिससे कि इस पर रोक लगे और उन बच्चों की असली परेशानी को जानकर उनके पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ जीवन यापन के लिए कोई व्यवस्था की जाए इस ओर किसी की नजर क्यों नहीं जाती बाल श्रम के नाम पर बड़ी बड़ी NGO काम कर रही हैं वह इस ओर कोई ध्यान नहीं देती शादी और बारात एक ऐसा मौका होता है जिसमें अधिकारियों के साथ साथ NGO के लोक भी कभी ना कभी तो जाते ही होंगे और कभी ना कभी इनकी नजर भी पढ़ती होगी
सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि किस तरह से इस तरह की बाल श्रम पर रोक लगा सके क्योंकि इसके लिए अलग से मंत्रालय है अलग से मंत्री कार्य करते हैं कई एनजीओ कार्य करते समाजसेवी संस्थाएं कार्य करती है उसके बाद भी अगर इस तरह से बाल श्रम होता है और बच्चों को सुख सुविधाएं नहीं मिल पा रही है जिसके वह हकदार हैं तो कहीं ना कहीं विकास के साथ-साथ देश पर भी धब्बा लगता है
200 रुपए के लिए घंटों के  हिसाब से उठाते हैं रोड लाइट
इन बच्चों से बात करने पर यह पता चलता है कि यह बच्चे 200 रुपए  के लिए घंटों के हिसाब से रोड लाइट जाते हैं 1 दिन में तीन तीन शादियों में यह रोड लाइट जाने का काम करते हैं प्रति शादी इन्हें 200 से ढाई सौ रुपए का पेमेंट किया जाता है आखिर यह छोटी उम्र के बच्चे कैसे 3 का बोझ अपने कंधों पर उठाते उनका कहना है ऐसा अपने परिवार के भरण पोषण के लिए कहते हैं ।