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वो छ : कारण जो बताते हैं कि एपल फोन एक आम भारतीय के लिए नहीं है !

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नई दिल्ली ब्योरो रिपोर्ट :- भारत में सितम्बर 12 को आई फोन 8 लांच होने जा रहा है और चारो ओर इसकी चर्चा है पर दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाईल बाजार में एपल अभी भी अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है|

कंतार वर्ल्ड पैनल रिपोर्ट के अनुसार भारत के मोबाईल बाजार में एपल का हिस्सा मात्र तीन प्रतिशत है जिसकी बहुत ज्यादा बढ़ने की सम्भावना आई फोन 8 लांच के बाद भी नहीं है |भारत के उपभोक्ताओं का मिजाज अमेरिका या दुनिया के किसी अन्य विकसित देश की तरह नहीं है इसलिए आई फोन आठ की बिक्री उन्हीं वर्ग के बीच होगी जो आर्थिक रूप से समर्द्ध है और फोन उनके लिए काम की चीज नहीं बल्कि स्टेट्स सिम्बल है |

आइये जानते हैं वो छ: कारण जिनकी वजह से एपल के फोन का विस्तार भारत फिलहाल उतनी तेजी से नहीं होगा जितना अन्य ब्रांड्स का :

• पैसे की पूरी कीमत नहीं वसूलता: एपल आपसे सिर्फ ब्रांड का ही पैसा लेता है पर इतने महंगे फोन के मुकाबले इससे कहीं सस्ते और अच्छे फोन भारत में उपलब्ध हैं और भारत की आम जनता इतनी अमीर नहीं है |इसी कारण भारत की आम जनता इनसे दूरी बनाये रखती है |

• एंड्रॉयड फोन के मुकाबले कोई “जुगाड़” नहीं चलता :फोन की मेमोरी सीमित होती है आप सिर्फ कार्ड बदल के फोन की स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ा नहीं सकते क्योंकि इसमें कोई कार्ड नहीं लगता और ज्यादा स्टोरेज के लिए ज्यादा पैसे खर्चने होंगें नहीं तो बार अपने डाटा या तो डीलीट कीजिये या बैक अप लीजिये और सबसे ख़ास बात एपल मतलब सिर्फ आप कोई जुगाड़ इसमें नहीं लगा सकते जो अन्य एंड्रॉयड फोन में आसानी से हो जाता है |

• बड़ी और एच डी स्क्रीन का न होना: आजकल वीडियो की लोकप्रियता बहुत तेजी से बड़ी है और लोग मोबाईल फोन को टीवी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं यू ट्यूब वैसे ही वीडियो क्रांति कर रहा है पर एपल के सारे फोन की स्क्रीन भारत में इस्तेमाल होने वाले औसत मोबाईल के मुकाबले छोटी और एच डी डिस्प्ले के बगैर है |इतनी कीमत के बावजूद इन कमियों का होना इसे भारतीयों से दूर करता है जो वीडियो और फिल्मों के दीवाने हैं |

• सर्विस सेंटर के अलावा कोई विकल्प नहीं है:एपल के फोन को किसी भी मोबाईल रिपेयरिंग सेंटर,जो आजकल भारत के हर कोने में खुल चुकी हैं, पर न तो खोला जा सकता है न ही रिपेयर किया जा सकता है |यदि सिर्फ बैटरी में ही समस्या हो तो भी आपको एपल सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़ेंगे |

आपने भी देखा होगा कि आईफोन कुछ पुराना हुआ नहीं कि लोग हर वक्त चार्जिंग पांइट खोजते नजर आते हैं|एपल के फोन के ऐसे नखरे आम भारतीय नहीं उठा सकता क्योंकि उनके जीवन में पहले से ही बहुत समस्याएं हैं |

• बहुतायत एप का पेड होना और क्रेडिट कार्ड का झंझट : एंड्रॉयड फोन में एप के मामले जितनी बहुलता और सुगमता है वह एपल फोन में नहीं रहती उसमें भी एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा ज्यादातर एप मुफ्त नहीं हैं और उनको खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड का होना जरुरी है |भारत इस मामले में भी विकसित देशों के मुकाबले अलग मिजाज का है जहाँ लोग मुफ्त की चीजें ज्यादा पसंद करते हैं |

सब कुछ एपल का ही चाहिए : आप सफ़र में है और चार्जर नहीं है तो किसी और फोन का चार्जर आप इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि एपल का चार्जर बाकी के एंड्रॉयड फोन चार्जर से अलग है |ब्लूटूथ से आप किसी दूसरे फोन में फाईल नहीं भेज सकते यानि आपको पूरी एपल फैमली लेकर चलना पड़ेगा और अपने साथियों को भी एपल
फोन खरीद्वाना पड़ेगा तभी आप एपल आईफोन का लुत्फ़ उठा पायेंगे |


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