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नंदी पर सवारी करने वाले बाबा हो गए तैयार

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नंदी पर सवारी करने वाले बाबा हो गए तैयार
नंदी पर सवारी करने वाले बाबा हो गए तैयार

नंदी पर सवारी करने वाले बाबा हो गए तैयार छा गई गुलाल मस्ती में झुम रही काशी,महाशिवरात्रि के पावन पर्व की तैयारियों के साथ ही लगन के गीतों से गूंज उठी है काशी, जाने कब गौने आएंगी गौरा

वाराणसी। बाबा विश्वनाथ की नगरी वैसे तो ‘सात वार तेरह त्यौहार’ के लिए जानी जाती है मगर इस नगरी में महाशिवरात्रि का अलग ही नजारा होता है। भोले की राजधानी होने के कारण नगरी के सभी देवालयों में बाबा के विवाहोत्सव का अलग ही उमंग होता है। धीरे-धीरे शिवभक्तों पर उनके विवाह की खुमारी चढ़ने लगी है। सभी देवालय और संस्थाओं में तैयारियां शुरु हो गई है।

शिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवालयों में दर्शन को उमड़ने वाली भीड़ और हर गली-मोहल्लों से बाबा भोले भंडारी का शिवबारात और कर्णो तक पहुंच रहे भक्ति भजन सच में खुद को विवाह में शामिल होने का एहसास कराता है। काशी का बच्चा-बच्चा खुद को इस अविस्मरणीय पल का साक्षी बनाने को उतावला रहता है। मान्यता के मुताबिक इसी दिन बाबा विश्वनाथ कैलाश पर्वत से चलकर दूल्हा के रुप में हिमपुत्री पार्वती के साथ विवाह रचाते है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 13 जनवरी को मनाया जायेगा।

काशीवासियों के लिए यह दिन इतना खास है कि वर्षभर में केवल इस दिन बाबा विश्वनाथ बिना थके पूरी रात भक्तों को नयनाभिराम दर्शन देते है और वैदिक ब्राम्हण मंत्रों के बीच भगवान का विवाह कराते है। मान्यता यह है कि इस अद्भुत क्षण के साक्षी केवल काशीवासी ही नहीं बल्कि पूरा देवलोक होता है। महाशिवरात्रि पर देवों के देव महादेव की रात को चारों पहर की आरती पूरे विधि-विधान से होती है। रविवार से हल्दी-तेल के साथ ही विवाह की तैयारियां शुरु हो गई है।

विवाह के दौरान वैदिक मंत्रों के साथ ‘आपन खोरिया संवार हो हिमवान बाबा, आवत बाड़ें दूलरु-दमाद’ जैसे विवाह के लोकगीत सप्ताह भर पहले ही घरों में गुजने लगते है। इन सब के बीच काशीपुराधिपति माँ पार्वती संग परिणय सूत्र में बंधते है।

अलौकिक और अदभुत क्षण की भागी बनने के लिए भक्तो में होड़ मची रहती है इसी नैनाभिराम दृश्य को समेटने के लिए भक्त पूरे वर्ष इस अवसर का इन्तजार करते है। भोर में होने वाली आरती में भोले शम्भू को अबीर गुलाल अर्पित किया जाता है और इसी के साथ पूरा मंदिर अबीर-गुलाल से पट जाता है।

एकादशी पर गौने आयेंगी गौरा

वसंत पंचमी पर बाबा भोलेनाथ का तिलकोत्सव तो शिवरात्रि पर बाबा का विवाह और रंगभरी एकादशी पर विश्वनाथ गौरा को लेकर गौने आते है। रजत प्रतिमा में बाबा विश्वनाथ माँ पार्वती संग भगवान प्रथमेश रजत पालकी पर ठाठ जमाते है और महंत आवास से गौना लेकर निकलते है। पूरे परिवार का एक साथ दर्शन करने को बाहर खड़ी भक्तों की लाइन हर-हर महादेव के गगनचुम्बी उद्घोष, ढोल-नगाड़े की थाप और शंखनाद से पूरा विश्वनाथ परिसर गूंज उठता है।

भगवान की पालकी निकलने से पूर्व पूरी प्रथा से गौने की रस्म निभाई जाती है। इसके साथ ही शिवाजंली का कार्यक्रम भी होता है। महंत कुलपति तिवारी ने बातचीत में बताया कि इस वर्ष गौने को और भी भव्यता दी जायेगी। दोगुने उत्साह और उमंग से बाबा काशीपुराधिपति का गौना 26 फरवरी को काशी मनाएंगी। जिसकी तैयारियां विवाह के बाद से शुरू हो जाएंगी।