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यज्ञ ही संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है: स्वामी वीरेन्द्र ,महाशिवरात्रि पर दो दिवसीय ऋषि बोधोत्सव शुरू 

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यज्ञ ही संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है: स्वामी
यज्ञ ही संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है: स्वामी
लाडवा, 12 फरवरी(नरेश गर्ग):आर्य समाज से जुुड़े स्वामी वीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि यज्ञ ही संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है। स्वामी वीरेन्द्र शास्त्री आर्य समाज मंदिर की प्रबंधक कमेटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय ऋषि बोधोत्सव कार्यक्रम के तहत आर्य समाज मंदिर में ऋषि बोधोत्सव के प्रथम दिवस पर अपने उद्बोधन में बोल रहे थेे। उन्होंने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम किसी भी प्रकार का परोपकार या दान करते समय अपना किसी न किसी प्रकार का स्वार्थ देखते हैं तथा अपने हिसाब से दान देते हैं।
उन्होंने कहा कि केवल अग्निहोत्र ही एक ऐसा परोपकारी कार्य है, जिसमें केवल कर्म करना हमारे हाथ में है। परंतु उसक ा फल देना सर्वत्र परमात्मा के अधीन है। उन्होंने कहा कि परमात्मा बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए वातावरण शुद्व करने का फल देता है। वहीं बिजनौर से आए कुलदीप विद्यार्थी ने भी अपने भजनोंसे सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अग्निहोत्र के साथ शुरू किया गया। इस अवसर पर अरविंद सिंघल, अनिल गोयल, महिन्द्र आर्य, रविन्द्र गुप्ता, जयदयाल, रतन शर्मा, डा. जयकिशन, रोहित गर्ग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।