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तीन दिवसीय ऋषि बोधोत्सव धूमधाम से सम्पन्न 

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तीन दिवसीय ऋषि बोधोत्सव
तीन दिवसीय ऋषि बोधोत्सव
लाडवा, 14 फरवरी(नरेश गर्ग):शहर के आर्य समाज मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय ऋषि बोधोत्सव धूमधाम से सम्पन्न हो गया। वहीं अरविंद सिंघल, ओमपाल ने यजमान के रूप में आहुुतियां डाली।
इस अवसर पर सहारनपुर से पधारे वेदविद्वान आचार्य वीरेन्द्र शास्त्री ने महार्षि दयानंद द्वारा प्रतिपादित आर्य समाज के सिद्वांतो पर प्रवचन किया। जिसमें उन्होंने कहा कि श्राद व तर्पज मृत व्यक्ति का न करके जीते हुए माता-पिता का करना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्राद का मतलब श्रद्वा से माता-पिता की सेवा करना, उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि तर्पज का मतलब मनुष्य के द्वारा माता-पिता की सेवा करने के बाद जो तृप्ति माता-पिता को मिलती है, उससे है।
उन्होंने समाज में फैल रही अंधविश्वास जात-पात जैसी करूतियों का खंडन किया व ईश्वर और धर्म के वास्तविक ाि प्रतिपादन किया। इससे पूर्व प्रात: कालीन सत्र में विश्व कल्याण हेतू यज्ञ किया गया। जिसमें अरविंद सिंघल एवं ओमपाल ने सपत्निक मुख्य यजमान के रूप में आहुुतियां डाली। बोधोत्सव की समाप्ति पर एक विशाल ऋषि लंगर का आयोजन किया गया।
जिसमें भारी संख्या में लोगों ने ऋषि लंगर में बने आलू, कढ़ी चावल, हलवा व रोटी का प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर अनिल गोयल, महिन्द्र पाल, डा. सुुशील सिंघल, डा. रवि अरोड़ा, रतन शर्मा, जगतप्रकाश, डा. जयकिशन आर्य, जयदयाल पंजेटा, राजीव आर्य, जयदेव, कर्मवीर, सत्येन्द्र अग्रवाल, राकेश गर्ग, अंजु सिंघल, निशि अग्रवाल, पूजा आर्य, मीनाक्षी छाबड़ा, प्रियंका पाहवा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।