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गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को स्वस्थ रखने में अपनी महती भूमिका निभायें आशा संगिनी – जिलाधिकारी

ब्यूरो प्रदीप गुप्ता

श्रावस्ती। जिले में प्रसव के उपरान्त जच्चा-बच्चा की ठीक से देखभाल न होने के कारण अक्सर माॅ और नवजात शिशु कुपोषित होकर बीमार हो जाते हैं। जागरूकता के अभाव में उनके परिवार वाले न तो बच्चे को जिला अस्पताल में स्थापित एस0एन0सी0यू0 में भर्ती करा पाते है और न ही समय से जच्चा का ही इलाज करा पाते हैं। इससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती है। यही कारण है कि भारत वर्ष में इस जनपद में मातृ एवं शिशु का मृत्यु दर अधिक है, जो बहुत ही चिन्ता का विषय है। आशा संगिनियाॅ अपने-अपने क्षेत्रों में आशाओं के गतिविधियों पर ध्यान रखें तथा उनके द्वारा गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा करें तथा महिला होने के नाते वह स्वयं महिलाओं एवं बच्चों को स्वस्थ्य रखने में अपनी महती भूमिका निभाकर इस जनपद में हो रहे मातृ एवं शिशु के मृत्यु दर में कमी लायें।   

उक्त विचार कलेक्ट्रेट सभागार में आशा संगिनियों के साथ बैठक करने के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा ने व्यक्त किया । उन्होनें जोर देते हुए कहा कि यह जनपद शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछडा है।  भारत सरकार के नीति आयोग में जिले का चयन हो गया है, इससे निश्चित ही जिले का हर क्षेत्र में समुचित  विकास होगा। जिले में जागरूकता के अभाव में बच्चियों की शादी नाबालिग उम्र में ही कर दी जाती है और वे परिपक्व नहीं हो पाती है और गर्भवती होकर बच्चे की माॅ बन जाती हैं यह भी कुपोषण का सबसे बड़ा कारण है। आशा संगिनियों को चाहिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करके नाबालिग विवाह प्रथा को रोकें तथा बढती जनसंख्या को रोकने के लिए हम दो हमारे दो के सिद्धान्त पर लोगों में जागरूकता पैदा करें ।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि वे आशाओं के माध्यम से समय से गर्भवती महिलाओं का चिन्हाकंन करायें तथा प्रथम टीकाकरण के समय ही उनसे उनका बैंक खाता संख्या एवं आधार की फोटो कापी भी जमा कराना सुनिश्चित करें। ताकि संस्थागत प्रसव के बाद लाभार्थी को सरकार द्वारा प्रदत्त जननी सुरक्षा योजना से लाभान्वित किया जा सके ।

इस अवसर पर सीएमओ बी0के0 सिंह तथा अन्य चिकित्साधिकारीगण एवं आशा संगिनी उपस्थित रहीं ।