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प्रकति की मार से फिर कराह उठा किसान जिले मे भारी ओलावृषि्ट से फिर टूटी किसान की कमर तेज बारिश के साथ गिरे ओले………………………………..

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प्रकति की मार से फिर कराह उठा किसान
प्रकति की मार से फिर कराह उठा किसान

बाँदा ब्यूरो चीफ के.के. गुप्ता :- .बाँदा जनपद मे बीती रात्रि को तेज बारिश.के साथ भारी ओला वृषि्ट हुयी। जिस वजह से चना गेहूँ दलहन व तिलहन की फसलो का जबरदस्त नुकसान हुआ है।

विगत कयी वर्षो से सूखा की मार झेल रहे बुन्देलखण्ड के किसानो की पहले ही कमर टूट चुकी थी।अब प्रकति की मार ऐसी पडी कि किसान कराह उठा ।विगत क ई सालो से सूखा व बैँक लोन की वजह से पहले ही आत्म हत्या कर चुके है।ओला वृषि्ट मे पक्षियो व क ई जानवर की मृत्यु हो गयी । एवँ तेज हवा के चलने के कारण बहुत पेड धराशायी हो गये।

बुन्देल खण्ड का किसान सूखा की वजह से पहले ही पलायन कर चुका है।क्योकि बैँक लोन से ग्रसित किसान या तो आत्म हत्या कर लेता है अथवा पलायन करने के लिये बाध्य हो जाता है।क्योकि किसान के द्वारा लगायी गयी लागत व परिश्रम किसान को नही मिल पाता।किसान अनाज पैदा करता है उसके अनाज के मूल्य का निर्धारण सरकार करती है।

वही कोई उद्मोगपति कोई कँपनी डालता है और सामान का प्रोडक्शन करता है तो वह सामान का मूल्य स्वयँ निर्धारण करता है। और बेहतर जगह मे रहता है।वही किसान खेत मे रात दिन मेहनत करता है।और हल स्वयँ चलाता है तो उसको अपने अन्न का मूल्य निर्धारण करने अधिकार सरकार द्वारा क्यो छीन लिया गया है। स्वतः सरकार फैसला करती है ।

ऐसा क्यूँ अन्न दाता के साथ उपेक्षापूर्ण रवैया क्यो। लालबहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था। जय जवान जय किसान का मगर आज किसान अपनी बदहाली पर रो रहा है आत्म हत्या कर रहा है। अब किसानो के नुकसान की भरपाई योगी सरकार किस तरह करती है आने वाला वक्त बतायेगा।