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शिक्षा माफियाओं के आगे प्रशासन ने टेके घुटने अभिभावकों की जेब मे प्राइवेट विद्मालय वाले डाल रहे है डाका जानिये केसे

शिक्षा माफियाओं के आगे प्रशासन ने टेके घुटने

बाँदा रिपोर्ट के के गुप्ता :-  अतर्रा व जिले भर मे चल रहे मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता प्राप्त विद्मालय तो धडल्ले से चल ही रहे है । गैर मान्यता प्राप्त विद्मालय तो हर गली मे मिल जायेंगे जो कि अपने विद्मालय मे प्रवेश लेकर के मान्यता प्राप्त विद्मालय से परीक्षा दिलवा देते है। परन्तु इस समय किताबों व टाई ड्रेस मे कमीशनखोरी का चक्कर तो मान्यता प्राप्त व गैर मान्यता विद्मालयो मे जबरदस्त तरीके से फल फूल रहा है । जिस पर जिला प्रशासन अँकुश लगाने मे पूर्णतया नाकामयाब साबित दिख रहा है। जबकि राज्य सरकार द्वारा शासनादेश जारी हो चुका है कि मान्यता प्राप्त विद्मालयो मे एन.सी.ई.आर.टी.का ही पाठ्यक्रम चलेगा ।

इसके बावजूद भी विद्मालयो की दुकानें सेट है ।जो कि दस रु.की कीमत की पुस्तक मनमाने दामो मे बेची जा रही है। मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बावजूद जिला प्रशासन मान्यता प्राप्त विद्मालयो मे अँकुश नही लगा पा रहा है। शिक्षा माफिया इस कदर हावी है कि अभिभावकों के जेब मे दिनदहाड़े डकैती डाल रहे है। इस बावत जब हमने सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी नरैनी से फोन से बात की तो उन्होंने स्वीकार किया कि इस पर अँकुश लग पाना बहुत ही टेढी खीर है।

मान्यता प्राप्त करते समय यह सरकार और विद्मालय के बीच समझौता होता है कि विद्मालय मे एन.सी.ई.आर.टी. का ही पाठ्यक्रम चलेगा। इसके बावजूद भी यह लोग मनमाने तरीके से अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे है। प्रशासन चुप्पी साधे हुये है। गैर मान्यता प्राप्त विद्मालयो का भी यही हाल है।प्रशासन द्वारा ऐसे विद्मालयो की मान्यता रद्द कर इनके खिलाफ विधिक कार्यवाही करने से क्यों कतरा रहा है।