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पॉलिथीन पर रोक बेअसर, लोगों पर नहीं हो पा रहा असर ग्रामीण सहित नगरीय इलाकों में पालीथिन बैन बेअसर

पॉलिथीन पर रोक बेअसर, लोगों पर नहीं हो पा रहा

घाटमपुर रिपोर्ट अतुल त्रिवेदी :-  प्रदेश सरकार द्वारा एक बार फिर से प्रदेश भर में 15 जुलाई से पालीथिन प्रतिबंधित करने का फरमान जारी किया है। यह कोई पहला और नया आदेश नहीं है। इससे पहले भी कई बार कोर्ट के आदेश पर पालीथिन बंदी को लेकर प्रदेश सरकार पहल कर चुकी है, लेकिन कुछ दिनों बाद से फरमान नगर से लगायत ग्रामीण अंचल में बेअसर ही नजर आए। सोमवार को भी पालीथिन का इस्तेमाल बेधड़क किया जा रहा है।

जबकि आदेश के दो दिन बाद पालीथिन बंद कराने के लिए प्रशासन और नगर निकायों की अभी तक कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। पर्यावरण के लिए बेहद ही खतरनाक पतली पालीथिन के दुष्प्रभाव अधिकांश लोग जानते हैं। जिसके चलते पूर्व में सरकारें समय-समय पर इसे रोकने के लिए आदेश जारी करती रही हैं। जबकि अदालत के आदेश के बाद तो प्रदेश में शासनादेश ही जारी कर दिया गया था। जिसके मुताबिक 21 जनवरी 2016 से पालीथिन कैरी बैग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।

तत्कालीन समय में प्रशासन की ओर से कड़ाई की गई थी और कुछ दिनों तक आदेश का असर भी दिखा था। कई जगह छापेमारी की गई और पालीथिन जब्त भी की गई थी लेकिन कुछ दिन की कवायद के बाद इसे बंद कर दिया गया और फिर से पालीथिन को मौन स्वीकृति मिल गई। लोगों द्वारा इसका प्रयोग फिर से किया जाने लगा। इस बीच कोई कार्रवाई न होने से इसके प्रयोग और व्यापार ने फिर से गति पकड़ ली।

वर्तमान प्रदेश सरकार ने भी इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। जिसके तहत आदेश जारी किया गया है कि 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से कम की पालीथिन और पतली प्लास्टिक की प्लेट और गिलास प्रतिबंधित किए जाएंगे। आदेश आ चुका है, लेकिन इस पर अमल और इतनी बड़ी कार्रवाई करने के लिए कवायद तक शुरू नहीं हुई है।

तहसील में खप जाती है एक कुंतल पालीथिन
तहसील भर में अनुमान के मुताबिक रोजाना एक कुंतल पॉलीथिन खप जाती है। इनके अलावा वैवाहिक समारोहों में पतली प्लास्टिक के गिलास और प्लेटों की खपत भी काफी अधिक है। हर रोज बाजार से घर तक पहुंचने वाली पालीथिन का तीन चौथाई हिस्सा कूड़े में पहुंच जाता है। चोक पड़े नाले-नालियों की स्थिति पालीथिन के प्रयोग और दुष्प्रभाव को हर रोज सामने लाती है। जिस पर जिम्मेदार आंखें मूंद लेते हैं।
लोगों की दिनचर्या में शामिल हो गई पॉलिथीन
घर से बाहर सामान लेने के लिए कपड़े का थैला हाथ में हो, इस तरह की लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। हर छोटी बड़ी जरूरत के लिए पॉलिथीन का प्रयोग लोगों की दिनचर्या में शामिल हो गया है। रविवार को पॉलिथीन पर बैन लगने का आदेश भले ही लागू हो गया हो लेकिन लोग पुरानी आदत की तरह खाली हाथ ही बाजार पहुंचे। लोगों का कहना था कि शासन प्रशासन पिछले कुछ दिनों में तीन बार इस प्रकार की बंदी की घोषणा कर चुका है।
लोग इसके लिए मन भी बनाते हैं, लेकिन दुकानदारों पर सख्ताई न होने के कारण सब कुछ पुराने ढर्रे पर ही लौट आता है । अदालत के आदेश के बाद जारी शासनादेश में पालीथिन के निर्माण, व्यापार और इस्तेमाल पर प्रतिबंध के साथ ही दंड का भी प्रावधान किया गया था। जिसके तहत प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर पांच साल तक की सजा या एक लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। पालीथिन पर प्रतिबंध को लेकर शासन की मंशा के अनुसार पालिका प्रशासन गंभीर है।
बोले जिम्मेदार
लोगों के इसके प्रयोग के दुष्प्रभावों बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही छापेमारी भी की जा रही हैं । पालीथिन पकड़े जाने पर जब्त किए जाने के साथ आवश्यक कार्रवाई भी होगी।
नीलम चौधरी , अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद घाटमपुर