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सरकार बदली लेकिन हालात नही बदले … वनांचल के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे है … ग्रामीण कलेक्ट्रेट आकार लगा रहे है फरियाद … कलेक्टर रजत बंसल उन ग्रामीण इलाकों का दौरा भी कर चुके है ….

छत्तीसगढ़ धमतरी  ... एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार विकास के बड़े-बड़े दांवे कर रही है …  तो वही दुसरी ओर वनांचल क्षेत्र के आदिवासी बहुल्य इलाका नगरी विकास खंड आज भी मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है .. सरकार बदली, लेकिन हालात नहीं बदले … आज भी जिले के नगरी विकास खंड के वनांचल क्षेत्र में कोई परिवर्तन नही आया है …जहां नगरी विकास खंड के लास्ट बार्डर मे बसे करीब दस ग्राम पंचायतों में आज भी बुनियादी मूलभूत सुविधाओं की कमी है ….जहां ना तो सड़क है, ना बिजली है, ना पानी है, और ना ही स्वास्थ्य और शिक्षा लोगों को मिल पा रहा है….जिसकी शिकायत लिए उड़ीसा बार्डर से लगे आदिवासी बहुल्य नगरी विकास खंड के रिसगांव, खल्लारी, लिखमा,मैनपुर, घुटकेल, मेंचका समेत दस ग्राम पंचायतों से लोग क्षेत्र की बुनियादी मुलभूत सुविधाओं की मांग व जंगल से आय के स्त्रोत के रूप में, चार, तेंदुपत्ता,महुआ, बेहडा, इत्यादि फसलों को तोड़ने की अनुमति लेने भारी संख्या मे 100 किमी दूर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय धमतरी पहुंचे थे ……वही धमतरी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ इस क्षेत्र का दौरा कर चुके है जहां धमतरी कलेक्टर रजत बंसल ने हर संभव मदद करने की बात कही थी… लेकिन कार्य प्रारंभ होने के बजय वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों को फारेस्ट विभाग के व्दारा तेदुपत्ता तोडने नही दिया जा रहा है …  फारेस्ट विभाग के व्दारा मना किया गया है …  जिसके लिए अनुमति लेने रिसगांव क्षेत्र से करीब दस ग्राम पंचायतों से भारी संख्या मे लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे… लेकिन कुछ कारण वश कलेक्टर से मुलाकात नही हो पाया जिससे लोग थोडा मायुस थे  .. वे अपनी समस्या कलेक्टर रजत बंसल को बैठकर अवगत कराना चाहते थे … लेकिन मुलाकात नही होने के कारण अपर कलेक्टर के.आर. ओगरे को ज्ञापन सौपकर वापस चले गये….

वही  तेदुपत्ता तोडने के संबंध मे वनमंडलाधिकारी अमिताभ वाजपेयी का कहना है  … कि ये हमारे विभाग के तरफ से नही बल्कि सुप्रीम हाईकोर्ट का आर्देश है वो प्रतिबंधित क्षेत्र है …

अब देखना ये होगा कि कब तक इन भोलेभाले आदिवासियों को बुनियादी मूलभूत सुविधा मिल पायेगा या यू ही वोट बैंक की राजनीति  में ।पिसते रहेंगे……