Home Banda बुन्देलखँड पृथक राज्य क्यो नही बनाया जा रहा क्या है वजह

बुन्देलखँड पृथक राज्य क्यो नही बनाया जा रहा क्या है वजह

बाँदा ब्योरो रिपोर्ट :- आखिर क्यूँ नही बनाया जा बुन्देलखँड पृथक राज्य इसके पीछे की कहानी कुछ इस प्रकार है । जैसा कि हमारे सूत्रो के हवाले से यह खबर है कि बुन्देलखँड मे खनिज सँपदा का बहुत बडा भँडार है। जिससे राज्य सरकार केन्द्र सरकार के अफसरो के पास राजस्व के आलावा बहुत मोटी रकम खनन माफियाओ के द्वारा भेजी जाती है जिससे इनका ऐशो आराम का खर्चा चलता है देश के कोनै कोने मे इनके फ्लैट होटल मिल जायेगे मनी लाँडि्ग भी इन्ही के पास होती है। गौर करने की बात यह भी है कि बुन्देलखँड के बाँशिदो को रोजी रोटी की जुगाड मे दूसरे राज्यो के लिये पलायन करना पडता है।

यह भी एक बहुत बडी विडँबना है। बुन्देलखँड पृथक राज्य के लिये बुन्देलखँड इँसाफ सेना के राष्टी्य अध्यक्ष एस.नोमानी जी अपनी सेना के साथ लगभग पाँच माह से बाँदा अशोक लाट पर अनशन मे बैठे हुये है तथा प्रधानमँत्री नरेन्द्र मोदी एवँ महामहिम राष्ट्पति को अपने रक्त से पत्र भी लिखा परँतु किसी का दिल नही पसीजा और न ही राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के नुमाँइदो को आज तक दिखाई ही नही दे रहा है कि अनशनकारी क्यूँ बैठे है।

आखिर क्यूँ यह भी एक बडा सवाल है कि अनशनकारियो की कोई सुधि लेने के लिये राज्य व केन्द्र से अभी तक कोई नुमाँइदा नही आया न ही राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के द्वारा कोई आश्वासन दिया गया कि बुन्देलखँड राज्य कब बनेगा ।जबकि उमाभारती ने झाँसी मे रैली के दौरान यह घोषणा की थी कि अगर बी.जे.पी सरकार बनी तो बुन्देलखँड पृथक राज्य बन के रहेगा। मगर उमाभारती के दावे व वादे जो जनता से किये थे सारे के सारे हवा हवाई साबित हो रहे। आज पूरे बुन्देलखँड को खनन माफिया खोखला कर रहे है जिसको शासन व प्रशासन के लोग आँख बँद करके धृतराष्ट् बन के सब कुछ देख व सुन रहे है। वह दिन दूर नही है जब यहाँ की जनता को बूँद बूँद पानी के लिये तरसना पडेगा नदियाँ नाले मे तब्दील हो चुकी है ।

पहाड खोखले हो गये है भारी भारी मशीने लगाकर खनन का कार्य जोरो पर चल रहा है। एन.जी.टी.के नियमो को खनन माफिया व अधिकारी सभी ताक मे रखे हुये है। अगर देखा जाये तो बुन्देलखँड मे लगातार कयी सालो से अकाल को झेल रहा है । परँतु इन सबकी चिँता एसी मे रहने वालो को कहाँ है। बुन्देलखँड मे पर्यावरण का सँतुलन बुरी तरीके से बिगड चुका है। खेतो के सतहो की नमी तक समाप्त हो चुकी है बीज तक अँकुरित नही हो रहे है। अगर यही हाल रहा तो जल्द ही बुन्देलखँड रेगिस्तान मे तब्दील हो जायेगा। इसकी फिक्र किसी को नही है चँद कागज के टुकडो के लिये जमीर बेचे जा रहे है।

पूरा सिस्टम बिकाऊ है केवल खरीददार होना चाहिये।बुन्देलखँड पृथक राज्य के लिये डिबेट नही हो रही है जब कि छोटे छोटे टापिको पर डिबेट होती है ।
ओवरलौडिँग के विषय मे अगर देखा जाये तो आपको हर रास्ते मे चौबीसो घँटे ओवरलोड ट्क टे्क्टर जरुर मिल जायेगे । जो कि करोडो रुपये की लागत से बनाई गयी लोक निर्माण विभाग की सडको मे गड्ढे कर रहे है । तथा प्रशासन के सामने से दिन रात फर्राटे भर रहे है एवँ दुर्घटनाये भी कर रहे है।

परन्तु कहते है कि चाँदी का जूता किसी के भी मार दो वह चुप रहता है। वही हाल बेबस बुन्देलखँड के है। बुन्देलखँड पृथक राज्य की माँग के लिये बुन्देलखँड इँसाफ सेना के साथ ही बुन्देलखँड किसान युनियन व बुन्देलखँड मुक्तिमोर्चा ये सभी सँगठन काफी अर्से से जनाँदोलन चला रहे है परँतु बेबस बुन्देलखँडवासियो की तरफ कोई ध्यान देने के लिये तैयार नही है।

रिपोर्ट के के गुप्ता