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पत्रकार को पहले पुलिस अधिकारी ने बुलाया फिर हुआ हमला उसके बाद पीडित पत्रकार के खिलाफ ही थाना अतर्रा मे दर्ज की गयी एन.सी.आर.

पत्रकार को पहले पुलिस अधिकारी ने बुलाया फिर हुआ हमला

अतर्रा/बाँदा:- थाना अतर्रा के मुहल्ला राजनगर मे पत्रकार का मकान तथा कुछ खाली भूमि है जिस पर पत्रकार के पिलर भी बने हुये है। जिस पर जमीदार राकेश दुबे आदि के द्वारा माननीय सिविल न्यायालय मे वाद दायर कर रखा है। लेकिन दौरान मुकदमा राकेश दुबे आदि की माँ के द्वारा प्रवीण सिँह पुत्र नन्दलाल सिँह के नाम भूमि का बैनामा करवा देते है । जो कि गाटा सँ. 7418 वर्ग 14 श्रेणी 3 की बँजर भूमि है। जिसका विधिक तरीके से बैनामा रजिस्टर्ड नही कराया जा सकता लेकिन यह तो उ. प्र. है यहाँ तो सब कुछ सँभव है। कुछ भी हो सकता है । परन्तु अभी तक दाखिल खारिज नही हो पाया लेकिन यह भी असँभव नही है।

अब हम बात करते है उस भूमि की जिस पर हम अपने पूर्वजो के समय से काबिज दखीलकार चले आ रहे है तथा इस बावत नगरपालिका परिषद् के गृहकर दाता भी है। जब से नगरपालिका की नगर अतर्रा मे स्थापना हुयी तब से ।

परन्तु दबँगो के लिये तो सब कुछ आसान है पैसा खर्च करो सब कुछ हाजिर है शायद यह कहावत गलत नही होगी । अब आप समझिये कि माननीय न्यायालय मे वाद विचाराधीन होने के बावजूद पुलिस क्षेत्राधिकारी का मौका मुआयना क्या उचित है जब कि किसी प्रकार.का कोई दँगा फसाद मौके पर नही हो रहा। तो क्या जरुरत है ऐसे मौका मुआयना करने से और सी.ओ.साहब की गाडी वापस होती है कि पत्रकार के ऊपर जानलेवा हमला हो जाता है ।क्या राजस्व परिषद् के द्वारा पुलिस विभाग को विवादित स्थल देखने का शासनादेश जारी कर दिया क्या ।बिना किसी सक्षम अधिकारी व न्यायालय के आदेश के बिना किसी भी भूमि का मौका मुआयना कर सकते है।यह भी पुलिस पर एक बडा प्रश्नचिन्ह है।

पीडित पत्रकार की तरफ से एन.सी.आर. दर्ज की जाती है।लेकिन दूसरे पक्ष की तरफ से किस आधार पर की गयी आप यह भी जान रहे है कि मै अकेला आपके साथ था तो मै बारह से पँद्रह लोगो से कैसे लड सकता हूँ ।

अगर देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम मे पुलिस की भूमिका सँदिग्ध है।
पत्रकार के.के. गुप्ता जिला सँवाददाता टाप न्यूज